🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 374

The Book of Childhood · Entry 374 of 760 · type: चौपाई

तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाए। हरषित ते अपने गृह आए।। मय तनुजा मंदोदरि नामा। परम सुंदरी नारि ललामा।। सोइ मयँ दीन्हि रावनहि आनी। होइहि जातुधानपति जानी।। हरषित भयउ नारि भलि पाई। पुनि दोउ बंधु बिआहेसि जाई।। गिरि त्रिकूट एक सिंधु मझारी। बिधि निर्मित दुर्गम अति भारी।। सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा। कनक रचित मनिभवन अपारा।। भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा।। तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 374 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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