🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 362

The Book of Childhood · Entry 362 of 760 · type: चौपाई

आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।। जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।। मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।। कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।। गएँ जाम जुग भूपति आवा। घर घर उत्सव बाज बधावा।। उपरोहितहि देख जब राजा। चकित बिलोकि सुमिरि सोइ काजा।। जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी।। समय जानि उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 362 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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