🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 31

The Book of Childhood · Entry 31 of 760 · type: दोहा/सोरठा

सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान। सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान।।14(क)।। सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर। करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।। कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल। बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।। बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ। सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।। बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस। जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।। बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ। संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।। बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि। होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 31 (दोहा/सोरठा) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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