🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 30

The Book of Childhood · Entry 30 of 760 · type: चौपाई

एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई।। ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।। चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे।। कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा।। जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।। भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।। होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।। जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।। कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।। राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।। तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 30 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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