🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 663

The Book of Ayodhyā · Entry 663 of 664 · type: चौपाई

देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।। नित नव राम प्रेम पनु पीना। बढ़त धरम दलु मनु न मलीना।। जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।। सम दम संजम नियम उपासा। नखत भरत हिय बिमल अकासा।। ध्रुव बिस्वास अवधि राका सी। स्वामि सुरति सुरबीथि बिकासी।। राम पेम बिधु अचल अदोषा। सहित समाज सोह नित चोखा।। भरत रहनि समुझनि करतूती। भगति बिरति गुन बिमल बिभूती।। बरनत सकल सुकचि सकुचाहीं। सेस गनेस गिरा गमु नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 663 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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