🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 657

The Book of Ayodhyā · Entry 657 of 664 · type: चौपाई

मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।। प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं।। जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।। उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू।। सई उतरि गोमतीं नहाए। चौथें दिवस अवधपुर आए। जनकु रहे पुर बासर चारी। राज काज सब साज सँभारी।। सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू। तेरहुति चले साजि सबु साजू।। नगर नारि नर गुर सिख मानी। बसे सुखेन राम रजधानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 657 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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