🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 637

The Book of Ayodhyā · Entry 637 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।। पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा। खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा।। चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।। सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ।। कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।। कतहुँ बैठि मुनि आयसु पाई। सुमिरत सीय सहित दोउ भाई।। देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।। फिरहिं गएँ दिनु पहर अढ़ाई। प्रभु पद कमल बिलोकहिं आई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 637 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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