🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 631

The Book of Ayodhyā · Entry 631 of 664 · type: चौपाई

धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई। मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू। भरत बचन सुनि भयउ उछाहू।। भरत राम गुन ग्राम सनेहू। पुलकि प्रसंसत राउ बिदेहू।। सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन। नेमु पेमु अति पावन पावन।। मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।। सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू।। राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।। एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 631 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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