🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 623

The Book of Ayodhyā · Entry 623 of 664 · type: चौपाई

जानहु तात तरनि कुल रीती। सत्यसंध पितु कीरति प्रीती।। समउ समाजु लाज गुरुजन की। उदासीन हित अनहित मन की।। तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।। मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा। तदपि कहउँ अवसर अनुसारा।। तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।। नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू।। जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।। तस उतपातु तात बिधि कीन्हा। मुनि मिथिलेस राखि सबु लीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 623 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷