🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 619

The Book of Ayodhyā · Entry 619 of 664 · type: चौपाई

कृपासिंधु लखि लोग दुखारे। निज सनेहँ सुरपति छल भारे।। सभा राउ गुर महिसुर मंत्री। भरत भगति सब कै मति जंत्री।। रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।। भरत प्रीति नति बिनय बड़ाई। सुनत सुखद बरनत कठिनाई।। जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।। महिमा तासु कहै किमि तुलसी। भगति सुभायँ सुमति हियँ हुलसी।। आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।। कहि न सकति गुन रुचि अधिकाई। मति गति बाल बचन की नाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 619 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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