🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 617

The Book of Ayodhyā · Entry 617 of 664 · type: चौपाई

कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।। काक समान पाकरिपु रीती। छली मलीन कतहुँ न प्रतीती।। प्रथम कुमत करि कपटु सँकेला। सो उचाटु सब कें सिर मेला।। सुरमायाँ सब लोग बिमोहे। राम प्रेम अतिसय न बिछोहे।। भय उचाट बस मन थिर नाहीं। छन बन रुचि छन सदन सोहाहीं।। दुबिध मनोगति प्रजा दुखारी। सरित सिंधु संगम जनु बारी।। दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।। लखि हियँ हँसि कह कृपानिधानू। सरिस स्वान मघवान जुबानू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 617 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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