🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 614

The Book of Ayodhyā · Entry 614 of 664 · type: चौपाई

प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।। सो करि कहउँ हिए अपने की। रुचि जागत सोवत सपने की।। सहज सनेहँ स्वामि सेवकाई। स्वारथ छल फल चारि बिहाई।। अग्या सम न सुसाहिब सेवा। सो प्रसादु जन पावै देवा।। अस कहि प्रेम बिबस भए भारी। पुलक सरीर बिलोचन बारी।। प्रभु पद कमल गहे अकुलाई। समउ सनेहु न सो कहि जाई।। कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।। भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 614 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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