🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 606

The Book of Ayodhyā · Entry 606 of 664 · type: चौपाई

सभा सकुच बस भरत निहारी। रामबंधु धरि धीरजु भारी।। कुसमउ देखि सनेहु सँभारा। बढ़त बिंधि जिमि घटज निवारा।। सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।। भरत बिबेक बराहँ बिसाला। अनायास उधरी तेहि काला।। करि प्रनामु सब कहँ कर जोरे। रामु राउ गुर साधु निहोरे।। छमब आजु अति अनुचित मोरा। कहउँ बदन मृदु बचन कठोरा।। हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।। बिमल बिबेक धरम नय साली। भरत भारती मंजु मराली।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 606 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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