🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 600

The Book of Ayodhyā · Entry 600 of 664 · type: चौपाई

भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।। सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे। अरथु अमित अति आखर थोरे।। ज्यौ मुख मुकुर मुकुरु निज पानी। गहि न जाइ अस अदभुत बानी।। भूप भरत मुनि सहित समाजू। गे जहँ बिबुध कुमुद द्विजराजू।। सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।। देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी।। राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।। सब कोउ राम पेममय पेखा। भउ अलेख सोच बस लेखा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 600 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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