🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 588

The Book of Ayodhyā · Entry 588 of 664 · type: चौपाई

सुनि भूपाल भरत ब्यवहारू। सोन सुगंध सुधा ससि सारू।। मूदे सजल नयन पुलके तन। सुजसु सराहन लगे मुदित मन।। सावधान सुनु सुमुखि सुलोचनि। भरत कथा भव बंध बिमोचनि।। धरम राजनय ब्रह्मबिचारू। इहाँ जथामति मोर प्रचारू।। सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।। बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।। भरत चरित कीरति करतूती। धरम सील गुन बिमल बिभूती।। समुझत सुनत सुखद सब काहू। सुचि सुरसरि रुचि निदर सुधाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 588 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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