🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 586

The Book of Ayodhyā · Entry 586 of 664 · type: चौपाई

तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।। पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।। जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।। गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।। पितु कह सत्य सनेहँ सुबानी। सीय सकुच महुँ मनहुँ समानी।। पुनि पितु मातु लीन्ह उर लाई। सिख आसिष हित दीन्हि सुहाई।। कहति न सीय सकुचि मन माहीं। इहाँ बसब रजनीं भल नाहीं।। लखि रुख रानि जनायउ राऊ। हृदयँ सराहत सीलु सुभाऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 586 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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