🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 582

The Book of Ayodhyā · Entry 582 of 664 · type: चौपाई

लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।। देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।। प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।। सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।। रउरे अंग जोगु जग को है। दीप सहाय कि दिनकर सोहै।। रामु जाइ बनु करि सुर काजू। अचल अवधपुर करिहहिं राजू।। अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।। यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 582 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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