🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 578

The Book of Ayodhyā · Entry 578 of 664 · type: चौपाई

ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।। राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।। भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।। कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।। जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।। कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ। अनुचित आजु कहब अस मोरा। सोक सनेहँ सयानप थोरा।। सुनि सुरसरि सम पावनि बानी। भईं सनेह बिकल सब रानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 578 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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