🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 574

The Book of Ayodhyā · Entry 574 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं।। सीय मातु तेहि समय पठाईं। दासीं देखि सुअवसरु आईं।। सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।। कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।। सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।। पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।। सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।। सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 574 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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