🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 572

The Book of Ayodhyā · Entry 572 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।। दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।। सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।। परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।। दाहिन दइउ होइ जब सबही। राम समीप बसिअ बन तबही।। मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला। राम दरसु मुद मंगल माला।। अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।। सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 572 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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