🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 568

The Book of Ayodhyā · Entry 568 of 664 · type: चौपाई

जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।। हंस बंस गुर जनक पुरोधा। जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा।। लगे कहन उपदेस अनेका। सहित धरम नय बिरति बिबेका।। कौसिक कहि कहि कथा पुरानीं। समुझाई सब सभा सुबानीं।। तब रघुनाथ कोसिकहि कहेऊ। नाथ कालि जल बिनु सबु रहेऊ।। मुनि कह उचित कहत रघुराई। गयउ बीति दिन पहर अढ़ाई।। रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।। कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 568 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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