🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 566

The Book of Ayodhyā · Entry 566 of 664 · type: चौपाई

जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।। तेहि कि मोह ममता निअराई। यह सिय राम सनेह बड़ाई।। बिषई साधक सिद्ध सयाने। त्रिबिध जीव जग बेद बखाने।। राम सनेह सरस मन जासू। साधु सभाँ बड़ आदर तासू।। सोह न राम पेम बिनु ग्यानू। करनधार बिनु जिमि जलजानू।। मुनि बहुबिधि बिदेहु समुझाए। रामघाट सब लोग नहाए।। सकल सोक संकुल नर नारी। सो बासरु बीतेउ बिनु बारी।। पसु खग मृगन्ह न कीन्ह अहारू। प्रिय परिजन कर कौन बिचारू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 566 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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