🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 563

The Book of Ayodhyā · Entry 563 of 664 · type: चौपाई

बोरति ग्यान बिराग करारे। बचन ससोक मिलत नद नारे।। सोच उसास समीर तंरगा। धीरज तट तरुबर कर भंगा।। बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।। केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।। बनचर कोल किरात बिचारे। थके बिलोकि पथिक हियँ हारे।। आश्रम उदधि मिली जब जाई। मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई।। सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।। भूप रूप गुन सील सराही। रोवहिं सोक सिंधु अवगाही।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 563 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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