🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 559

The Book of Ayodhyā · Entry 559 of 664 · type: चौपाई

सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।। एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन। रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन।। ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।। सावधान सबही सनमानहिं। सकल सराहत कृपानिधानहिं।। लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।। सील सकोच सिंधु रघुराऊ। सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ।। कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।। हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 559 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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