🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 557

The Book of Ayodhyā · Entry 557 of 664 · type: चौपाई

गरइ गलानि कुटिल कैकेई। काहि कहै केहि दूषनु देई।। अस मन आनि मुदित नर नारी। भयउ बहोरि रहब दिन चारी।। एहि प्रकार गत बासर सोऊ। प्रात नहान लाग सबु कोऊ।। करि मज्जनु पूजहिं नर नारी। गनप गौरि तिपुरारि तमारी।। रमा रमन पद बंदि बहोरी। बिनवहिं अंजुलि अंचल जोरी।। राजा रामु जानकी रानी। आनँद अवधि अवध रजधानी।। सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।। एहि सुख सुधाँ सींची सब काहू। देव देहु जग जीवन लाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 557 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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