🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 555

The Book of Ayodhyā · Entry 555 of 664 · type: चौपाई

दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।। सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति।। धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।। घर पुर देस राखि रखवारे। हय गय रथ बहु जान सँवारे।। दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।। भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा।। खबरि लेन हम पठए नाथा। तिन्ह कहि अस महि नायउ माथा।। साथ किरात छ सातक दीन्हे। मुनिबर तुरत बिदा चर कीन्हे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 555 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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