🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 553

The Book of Ayodhyā · Entry 553 of 664 · type: चौपाई

कोसलपति गति सुनि जनकौरा। भे सब लोक सोक बस बौरा।। जेहिं देखे तेहि समय बिदेहू। नामु सत्य अस लाग न केहू।। रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।। भरत राज रघुबर बनबासू। भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू।। नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।। समुझि अवध असमंजस दोऊ। चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ।। नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।। बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ। आएहु बेगि न होइ लखाऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 553 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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