🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 541

The Book of Ayodhyā · Entry 541 of 664 · type: चौपाई

सुर गन सहित सभय सुरराजू। सोचहिं चाहत होन अकाजू।। बनत उपाउ करत कछु नाहीं। राम सरन सब गे मन माहीं।। बहुरि बिचारि परस्पर कहहीं। रघुपति भगत भगति बस अहहीं। सुधि करि अंबरीष दुरबासा। भे सुर सुरपति निपट निरासा।। सहे सुरन्ह बहु काल बिषादा। नरहरि किए प्रगट प्रहलादा।। लगि लगि कान कहहिं धुनि माथा। अब सुर काज भरत के हाथा।। आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।। हियँ सपेम सुमिरहु सब भरतहि। निज गुन सील राम बस करतहि।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 541 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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