🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 533

The Book of Ayodhyā · Entry 533 of 664 · type: चौपाई

बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा। यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा।। मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।। फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकुता प्रसव कि संबुक काली।। सपनेहुँ दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू।। बिनु समुझें निज अघ परिपाकू। जारिउँ जायँ जननि कहि काकू।। हृदयँ हेरि हारेउँ सब ओरा। एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा।। गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू। लागत मोहि नीक परिनामू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 533 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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