🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 531

The Book of Ayodhyā · Entry 531 of 664 · type: चौपाई

सुनि मुनि बचन राम रुख पाई। गुरु साहिब अनुकूल अघाई।। लखि अपने सिर सबु छरु भारू। कहि न सकहिं कछु करहिं बिचारू।। पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।। कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा। मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ।। मो पर कृपा सनेह बिसेषी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी।। सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।। मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही। हारेहुँ खेल जितावहिं मोही।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 531 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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