🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 527

The Book of Ayodhyā · Entry 527 of 664 · type: चौपाई

आरत कहहिं बिचारि न काऊ। सूझ जूआरिहि आपन दाऊ।। सुनि मुनि बचन कहत रघुराऊ। नाथ तुम्हारेहि हाथ उपाऊ।। सब कर हित रुख राउरि राखें। आयसु किएँ मुदित फुर भाषें।। प्रथम जो आयसु मो कहुँ होई। माथें मानि करौ सिख सोई।। पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।। कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाषा। भरत सनेहँ बिचारु न राखा।। तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।। मोरें जान भरत रुचि राखि। जो कीजिअ सो सुभ सिव साखी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 527 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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