🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 525

The Book of Ayodhyā · Entry 525 of 664 · type: चौपाई

भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।। भरत महा महिमा जलरासी। मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी।। गा चह पार जतनु हियँ हेरा। पावति नाव न बोहितु बेरा।। औरु करिहि को भरत बड़ाई। सरसी सीपि कि सिंधु समाई।। भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।। प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु। बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु।। बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।। सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 525 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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