🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 517

The Book of Ayodhyā · Entry 517 of 664 · type: चौपाई

कीन्ही मातु मिस काल कुचाली। ईति भीति जस पाकत साली।। केहि बिधि होइ राम अभिषेकू। मोहि अवकलत उपाउ न एकू।। अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।। मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ।। मोहि अनुचर कर केतिक बाता। तेहि महँ कुसमउ बाम बिधाता।। जौं हठ करउँ त निपट कुकरमू। हरगिरि तें गुरु सेवक धरमू।। एकउ जुगुति न मन ठहरानी। सोचत भरतहि रैनि बिहानी।। प्रात नहाइ प्रभुहि सिर नाई। बैठत पठए रिषयँ बोलाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 517 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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