🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 512

The Book of Ayodhyā · Entry 512 of 664 · type: चौपाई

तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।। देब काह हम तुम्हहि गोसाँई। ईधनु पात किरात मिताई।। यह हमारि अति बड़ि सेवकाई। लेहि न बासन बसन चोराई।। हम जड़ जीव जीव गन घाती। कुटिल कुचाली कुमति कुजाती।। पाप करत निसि बासर जाहीं। नहिं पट कटि नहि पेट अघाहीं।। सपोनेहुँ धरम बुद्धि कस काऊ। यह रघुनंदन दरस प्रभाऊ।। जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।। बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 512 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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