🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 510

The Book of Ayodhyā · Entry 510 of 664 · type: चौपाई

कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।। भरि भरि परन पुटीं रचि रुरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी।। सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।। देहिं लोग बहु मोल न लेहीं। फेरत राम दोहाई देहीं।। कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।। तुम्ह सुकृती हम नीच निषादा। पावा दरसनु राम प्रसादा।। हमहि अगम अति दरसु तुम्हारा। जस मरु धरनि देवधुनि धारा।। राम कृपाल निषाद नेवाजा। परिजन प्रजउ चहिअ जस राजा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 510 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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