🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 508

The Book of Ayodhyā · Entry 508 of 664 · type: चौपाई

राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।। सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकुला।। पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।। मंगलमूरति लोचन भरि भरि। निरखहिं हरषि दंडवत करि करि।। राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।। झरना झरिहिं सुधासम बारी। त्रिबिध तापहर त्रिबिध बयारी।। बिटप बेलि तृन अगनित जाती। फल प्रसून पल्लव बहु भाँती।। सुंदर सिला सुखद तरु छाहीं। जाइ बरनि बन छबि केहि पाहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 508 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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