🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 504

The Book of Ayodhyā · Entry 504 of 664 · type: चौपाई

बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।। कहि जग गति मायिक मुनिनाथा। कहे कछुक परमारथ गाथा।। नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।। मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी।। कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।। सोक बिकल अति सकल समाजू। मानहुँ राजु अकाजेउ आजू।। मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।। ब्रतु निरंबु तेहि दिन प्रभु कीन्हा। मुनिहु कहें जलु काहुँ न लीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 504 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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