🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 502

The Book of Ayodhyā · Entry 502 of 664 · type: चौपाई

सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।। गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता।। बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।। सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं।। परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।। तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा। सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा।। जनकसुता तब उर धरि धीरा। नील नलिन लोयन भरि नीरा।। मिली सकल सासुन्ह सिय जाई। तेहि अवसर करुना महि छाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 502 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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