🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 498

The Book of Ayodhyā · Entry 498 of 664 · type: चौपाई

आरत लोग राम सबु जाना। करुनाकर सुजान भगवाना।। जो जेहि भायँ रहा अभिलाषी। तेहि तेहि कै तसि तसि रुख राखी।। सानुज मिलि पल महु सब काहू। कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू।। यह बड़ि बातँ राम कै नाहीं। जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं।। मिलि केवटिहि उमगि अनुरागा। पुरजन सकल सराहहिं भागा।। देखीं राम दुखित महतारीं। जनु सुबेलि अवलीं हिम मारीं।। प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।। पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी। काल करम बिधि सिर धरि खोरी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 498 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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