🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 496

The Book of Ayodhyā · Entry 496 of 664 · type: चौपाई

सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।। चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।। गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।। मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।। प्रेम पुलकि केवट कहि नामू। कीन्ह दूरि तें दंड प्रनामू।। रामसखा रिषि बरबस भेंटा। जनु महि लुठत सनेह समेटा।। रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।। एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 496 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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