🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 490

The Book of Ayodhyā · Entry 490 of 664 · type: चौपाई

सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।। पाहि नाथ कहि पाहि गोसाई। भूतल परे लकुट की नाई।। बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।। बंधु सनेह सरस एहि ओरा। उत साहिब सेवा बस जोरा।। मिलि न जाइ नहिं गुदरत बनई। सुकबि लखन मन की गति भनई।। रहे राखि सेवा पर भारू। चढ़ी चंग जनु खैंच खेलारू।। कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।। उठे रामु सुनि पेम अधीरा। कहुँ पट कहुँ निषंग धनु तीरा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 490 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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