🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 476

The Book of Ayodhyā · Entry 476 of 664 · type: चौपाई

जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को।। कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा।। लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।। इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।। सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।। चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।। समुझि मातु करतब सकुचाहीं। करत कुतरक कोटि मन माहीं।। रामु लखनु सिय सुनि मम नाऊँ। उठि जनि अनत जाहिं तजि ठाऊँ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 476 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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