🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 474

The Book of Ayodhyā · Entry 474 of 664 · type: चौपाई

तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।। गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।। मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई।। लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना।। सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।। भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।। गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।। कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 474 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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