🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 472

The Book of Ayodhyā · Entry 472 of 664 · type: चौपाई

जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।। तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।। अनुचित उचित काजु किछु होऊ। समुझि करिअ भल कह सबु कोऊ।। सहसा करि पाछैं पछिताहीं। कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।। सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।। कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।। जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।। सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 472 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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