🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 470

The Book of Ayodhyā · Entry 470 of 664 · type: चौपाई

उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।। बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।। आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।। राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।। आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।। जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।। तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।। जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 470 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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