🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 468

The Book of Ayodhyā · Entry 468 of 664 · type: चौपाई

सहसबाहु सुरनाथु त्रिसंकू। केहि न राजमद दीन्ह कलंकू।। भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ। रिपु रिन रंच न राखब काऊ।। एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।। समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।। एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।। प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।। अनुचित नाथ न मानब मोरा। भरत हमहि उपचार न थोरा।। कहँ लगि सहिअ रहिअ मनु मारें। नाथ साथ धनु हाथ हमारें।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 468 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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