🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 461

The Book of Ayodhyā · Entry 461 of 664 · type: चौपाई

सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।। जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।। उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।। सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।। सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।। सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।। लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।। अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 461 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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