🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 455

The Book of Ayodhyā · Entry 455 of 664 · type: चौपाई

भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।। जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।। हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।। सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।। कोउ कह दूषनु रानिहि नाहिन। बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन।। कहँ हम लोक बेद बिधि हीनी। लघु तिय कुल करतूति मलीनी।। बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।। अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 455 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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