🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 453

The Book of Ayodhyā · Entry 453 of 664 · type: चौपाई

कहहिं सपेम एक एक पाहीं। रामु लखनु सखि होहिं कि नाहीं।। बय बपु बरन रूप सोइ आली। सीलु सनेहु सरिस सम चाली।। बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।। नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।। तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।। तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।। कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।। भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 453 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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