🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 451

The Book of Ayodhyā · Entry 451 of 664 · type: चौपाई

जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।। रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।। प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।। चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।। आगें मुनिबर बाहन आछें। राजसमाज जाइ सबु पाछें।। तेहिं पाछें दोउ बंधु पयादें। भूषन बसन बेष सुठि सादें।। सेवक सुह्रद सचिवसुत साथा। सुमिरत लखनु सीय रघुनाथा।। जहँ जहँ राम बास बिश्रामा। तहँ तहँ करहिं सप्रेम प्रनामा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 451 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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